"भूख से मरने से बेहतर है घर लौट कर मरे, कंधा देने के लिए कोई तो होगा"। यह कहते हुए लोग डर के मारे घर को लौट रहे हैं लौट भी चुके हैं बहुत से लोग।
कल रात मेरे गाँव में आधी रात को 200 लोगों का जत्था अपने अपने घर वापस लौटा है। दिल्ली, उत्तरप्रदेश, महाराष्ट्र से ये लोग घर लौटे हैं। सुबह गाँव के स्कूल में जो गांव से थोड़ी दूर पर है, रखे गए हैं। अभी सभी ठीक ही लग रहे हैं। लेकिन कोई किट नहीं है जिससे इनकी जाँच की जा सके। (हम सभी को मालूम है की हमारे बिहार में भी संसाधन नहीं है, भारत में भी नहीं है और अभी ये कहना भी गलत नहीं होगा की पूरे जगत में अभी कोरोना के लिए हम तैयार नहीं है)। कोरोना से बचने के दो रास्ते हैं पहला ये की हम सभी तक कोरोना पहुँचे ही ना और दूसरा कोरोना पहुँचे भी तो उसका इलाज़ संभव हो। इटली की वर्तमान स्तिथि सभी को मालूम है की चिकित्सा के मामले में दुनिया में दूसरे नम्बर पर आता है। और हमारा देश शुरू के 100 में भी नहीं है। नहीं हमारे पास हॉस्पिटल की व्यवस्था है। पिछले दिनों बिहार के मुंगेर जिले का 38 वर्षीय युवक की मौत 21 मार्च को पटना एम्स में हो गयी। जिस एम्बुलेंस का प्रयोग उसे ले जाने में प्रयोग किया गया उसमें भी बाकी लोग कोरोना पॉजिटिव हो चुके हैं। एम्बुलेंस का ड्राईवर भी कोरोना पॉजिटिव निकला। इन सभी घटनाओं से हम सभी को ज्ञात है की हमारी सुरक्षा का बस एक रास्ता है की हम कोरोना से बचे रहें। सोशल डिस्टेंस ज़रूरी है साथ ही हमें ज़रूरत है लोगों से बात करने की। उन्हें हिम्मत देने की।
प्रधानमंत्री के "मन की बात" गाज़ियाबाद में बस के लिए जी जान लगाने वाले लोग नहीं सुन पाते हैं। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के 1.70 लाख करोड़ के पैकेज में क्या क्या मिलेगा यह लोगों को प्यार से धीरज से समझाने को ज़रूरत है। सुप्रीम कोर्ट के वक़ील विराग गुप्ता ने अनुच्छेद 360 का प्रयोग कर देश में आर्थिक इमरजेंसी लाने की भी बात कर रहे हैं। सभी अपना अपना मत देश के हित में दे रहे हैं।
भोपाल में रहने वाले दोस्तों में प्रशांत भैया, रोली दीदी, नीरू भैया, विश्वास एक नई सोच, वहीं दिल्ली में रहने वाले दोस्त प्रेरणा लोगों को मदद करने में दिन रात लगे हैं। बहुत सारे दोस्त अपने अपने स्तर पर सभी के लिए खड़े हैं। इंसानियत के लिए खड़े है। एक साथ हैं। अभी लॉक डाउन में हमें और आपको क्या करना है? इस कठिन समय में आप एक कॉल करें और कहें;
"ये ग़म के और चार दिन, सितम के और चार दिन
ये दिन भी जाएंगे गुज़र, गुज़र गए हज़ार दिन"
#bozokikalam
#go_Corona
फ़ोटो- दैनिक भास्कर से