Thursday, 23 October 2025

प्रिय प्रधानमंत्री जी!

प्रिय प्रधानमंत्री जी!

कोमल चरणों में सादर प्रणाम। हम सब यहां कुशल मंगल हैं। आशा है कि आप भी स्वस्थ और ख़ुश होंगे। मैं पहले कि दो पंक्तियां लिखनी ही पड़ती है इसीलिए लिख दिया। बहुत सी बातें हैं जो इस चिट्ठी में लिखना चाहता हूँ लेकिन दो बातों का डर है। पहला कि आपको ये चिट्ठी पढ़ने का समय मिलेगा या नहीं, आप देश विदेश के बहुत से मसलों में व्यस्त होंगे। दूसरा ये कि इस चिट्ठी को आपतक पहुंचने से पहले ही कोई अर्थ का अनर्थ न कर दे।

सुना है बिहार चुनाव में तो आप भी आयेंगे रैली के लिए। सीधे हवाई जहाज से उतरेंगे। हम कहते हैं आप खाली झूठे मुठे कह दीजिए कि आपका मन है बिहार के गांव गांव से होते हुए रैली के मंच तक पहुंचने का। भले ही आप सीधे आइए। आप सोचेंगे कि हम ऐसा काहे कह रहे हैं। आपको याद है एक बार और चिट्ठी लिखे थे, जब आप भोपाल आने वाले थे। उस समय एक ही दिन में भोपाल का सड़क चमकने लगा था। वैसा ही जादू हो जाएगा बिहार की गलियों में। वैसे ज़्यादा यूज तो होगा नहीं काहे कि गांव का नौजवान सब आपके अहमदाबाद सूरत में मजदूरी कर रहा है वहां का सड़क देखेगा।

आप रैली में थोड़ा समय निकालिएगा। आपसे सम्राट चौधरी जी के बारे में बात करनी है। प्रज्ञा ठाकुर और रेखा गुप्ता जी के बारे में भी बात करनी है। हमको लगता है आपके आसपास का लोग आपका फिरकी लेता है, आपको बताता नहीं होगा कि आपके नाम की मजबूती के कारण आपका नेता लोग कुछो बोलता है। देखिए आज ही सम्राट चौधरी जी बोले "RJD को टिकट नहीं मिला तो नाचने वाले को उतार दिया"। हमको मालूम है आप अभी ये पढ़कर तिलमिला उठे होंगे, सम्राट चौधरी जी को कॉल करके कहेंगे "कैसी बातें करते हो, कला को हे कि दृष्टि से देखते हो, नीचा दिखाते हो, हमारी संस्कृति का अपमान करते हो" 

अपमान से प्रज्ञा ठाकुर की याद आई। आपको पता है कैसे कैसे बयान देती हैं। इससे पहले आपको सफाई देनी पड़ी थी उनके बयान के लिए। अब फिर से अटपटे बयान जारी कर रखी हैं। हमको आप पर ही पूरा भरोसा है कि आप सीधे डांटेंगे उन्हें, क्योंकि भले ही आप देश के सबसे बड़े NGO (जैसा कि आपने 15 अगस्त को लाल किला से कहा था) के सदस्य रहे हों लेकिन आप इस देश की संविधान में भरोसा रखते हैं। यहां की एकता की बात करते हैं। एकता से याद आया दिल्ली में रेखा गुप्ता बहुत बढ़िया काम कर रही हैं, उन्होंने बताया कि पटाखे के कारण जो भी प्रदूषण हुआ है वो बाकी सालों से कम है। 

रेखा गुप्ता जी से बात हो तो पूछिएगा इस तरह का बयान देकर समस्या का समाधान हो जाएगा क्या। प्रधानमंत्री जी, हम यह सब नहीं पूछ सकते हमको बहुत डर लगता है सवाल करने में। एक आपसे ही उम्मीद है, आप सवाल करेंगे न तो काम भी हो जाएगा और कोई कुछ कहेगा नहीं। नहीं तो आजकल सवाल भी कहां कोई पूछने देता है। सवाल से याद आया आपने जो पेड़ लगाया था वो कैसा है अब? मोर खेलने आता है उधर?

सारे सवालों का जवाब मुमकिन न हो तो। मन के रेडियो में ही जवाब दीजियेगा। आपकी चिट्ठी के इंतज़ार में।

आपका 
सन्नी कुमार "बोज़ो"
भारत से 
23 अक्टूबर 2025

1 comment:

  1. बहुत सुंदर शब्दों से नवाज़ा है अपने।

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