Wednesday, 1 September 2021
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Saturday, 28 August 2021
डूबता सूरज
इससे पहले काविश को इतने ध्यान से नहीं सुना था। रात के 1 बजने को है। बिन मतलब बस लिखने को लिखना शुरू किया है। कितना अज़ीब है हर बात में मतलब ढूंढ़ना भी तो ठीक नहीं। जैसे रिश्तों में। जैसे बच्चों की हसीं में। जैसे किसी को बिन कुछ कहे देखने में। जैसे इस तस्वीर में डूबते हुए सूरज का मतलब क्या है। इतनी रात गये जगने का मतलब। बाढ़ के आने का मतलब। आसमां के बादलों का पानी में दिखने का मतलब। हर लिखे में तुम्हारा ख़याल आने का मतलब।
ऐसा नहीं लगता जैसे कभी कभी बिन सवाल किये भी साँसें चलती रहनी चाहिये। भले ही इंसान ज़िंदा न हो कम से कम ज़िंदा होने का भरम तो लगा रहे। ऐसे मुझे अभी नहीं पता कि काविश का दूसरा गाना "तेरे प्यार में" भी खूबसूरत लग रहा है।
गाँव के निचले हिस्से में जिनका घर है उनके घरों में पानी आ चुका है। मैं सोचता हूँ ये पानी हर आकार में ढल सकते हैं तो ऐसा क्यों नहीं करते कि सिर्फ़ वही रास्ता लेते जो एक खूबसूरत दृश्य बनाता हमेशा। फिर मैं सोचता हूँ ये आंखों का पानी भी तो भीतर की ओर हृदय तक बहता होगा और उसका परावर्तित अंश बाहर गालों से होते हुए हवाओं में सुख जाता है। पर अंदर की ओर बहने वाले उस पानी तक तो कोई सूरज की रोशनी नहीं पहुँचती।
बाहर का पानी हवाओं के स्पर्श से भी सुख जाता है और अंदर तक रोशनी भी मयस्सर नहीं। जिन घरों में पानी हैं वो बाढ़ के ख़तम होने के इंतिज़ार में कुछ महीने गुज़ार ही लेंगे। खेतों में आया बाढ़ पूरा का पूरा आईना बन चमकता है। दिन में आसमां भी उतर आता है नीचे। कभी कभी कुछ बादल कुछ बची हुई फसलों को देख तन्हा नहीं रहने देती, बरस जाता हैं। शायद बादलों को पता है अकेले ज़िंदा रहना अकेले मर जाने से भी भयानक है।
पिछली शाम जब ये डूबता सूरज दिख रहा था लगा सिर्फ़ सूरज डूबता रहता तो इतना अज़ीब नहीं लगना था। सूरज के डूबने के साथ पूरी रात के लिए डूब जाते हैं पेड़ों के पत्तो की हरियाली, चिड़ियों की उड़ान, बच्चों के खेल और लगता है मानों रात भर इन डूबे हुए हरियाली, उड़ान और खेल से कोई गीत गा रहा हो।
अभी काविश का गाना बदल कर मैंने बंदिश बैंडिट का "विरह" लगा दिया है।
Wednesday, 8 July 2020
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