यार!
ये दिन याद बहुत आएंगे....
कितना कुछ जिया है न,
हमनें इस पड़ाव में
लंच, शिवानी, सब यादें,
उस पेड़ की छाव में
वो ड्राफ्टर का डब्बा,
वो रोलर की रोलिंग
बंक मारने पर धमकी,
करूँ पैरेंट्स को कॉलिंग
MP नगर का चौराहा,
वही अब भी है पिपलानी
दोस्तों के चक्कर में यारों
बन जाते थे दानी
लेक व्यू की लहरें कहेंगी,
कहाँ गई वो टोली ?
जिसके होने से थी रंगत
दुनिया थी रंगोली,
कितना भी समेटें यादें
समेट नहीं पाएंगे,
यार!
ये दिन याद बहुत आएंगे,
याद बहुत आएंगे
रातों को देखेंगे तारें,
टेकरी की याद सताएगी
तुम्हारा दोस्त अच्छा है,
हमकों कौन बताएगी
अभिव्यक्ति का झूला,
ऊचें से हमको पुकारेगा
बर्थडे पर विश से पहले,
GPL कौन मरेगा
महंगे कॉफी मिलने पर
भी यादव की याद आएगी
सारे काम, सारी दुनिया,
यादों में रुक जाएगी
हाथों में हम चाय लिए
रोते भी मुस्काएँगे
यार!
ये दिन याद बहुत आएंगे,
याद बहुत आएंगे...
@बोज़ो