प्रिय बिहार!
पता तो होगा ही की चुनाव आने वाला है। खुशी की बात ये है कि अभी रैली करना मना है तो ट्राफ़िक जाम की दिक़्क़त नहीं होगी। एलसीडी की व्यवस्था तो आराम से हो रही है। फेसबुक, इंस्टा, ट्विटर पर लाइक और शेयर से सभी पार्टी और नेता अपना शक्ति प्रदर्शन करना शुरू हो चुका है। पार्टी प्रदर्शन तो राजाओं के समय से ही चला आ रहा है। सबसे पहले लोकतंत्र भी तो आप ही की देन है।
पता है जब देश के किसी दूसरे राज्य में होता हूँ तो अपने यहाँ से कुछ लोग मिलते हैं तो बिहार का गुणगान शुरू हो जाता है। पहला लोकतंत्र, पहले राष्ट्रपति, नालन्दा विश्वविद्यालय, मगध, अशोका, बुद्ध, महावीर का कुंडग्राम, जेपी का छात्र आंदोलन एक लंबी फेहरिस्त जिसे सुनकर कोई भी अभिभूत हो जाए कि सही में कितना ऐतिहासिक है बिहार की भूमि। यह सुनकर हम सभी का दिल खुश हो जाता है। मगर आप ध्यान से देखो इससे पहली वाली पंक्ति में "ऐतिहासिक" लिखा है।
वर्तमान??? इसके बारे में क्या कहेंगे???
■सबसे पहली बात "शराबबंदी" की कर लें तो अच्छा रहेगा। जब यह ऐलान हुआ की शराबबंदी होनी है। तो अलग ही माहौल हुआ। मतलब कहे तो एकदम हड़कम्प मच गया। जितने लोगों के पास पैसे थे उस समय सभी ने जितनी बोतलें हो सकी ख़रीद कर रख लिया। शराब पीकर शराबबंदी का ग़म मनाने लगे लोग। होली में भी सूखा ही रहेगा कैसे होगा विवाह शादी फंक्शन में शराब की पार्टी।
■दूसरी तरफ़ पूरे बिहार में वो घर चुपके से खुशी मना रहे थे जिनके घर में लोग पीकर घरेलू हिंसा करते हैं।
लेकिन....शराबबंदी के इतने सालों में क्या हुआ? कितना सफ़ल रहा? इस पर चर्चा होना चाहिए। कुछ दिन पहले बिहार के एक स्थानीय समाचार में करोड़ों रुपये का शराब बरामद किया गया। जिसमें उस गाँव के मुखिया के शामिल होने की भी पुष्टि हुई।(आप सभी दैनिक भास्कर के मुज़फ़्फ़रपुर एडिशन में यह समाचार देख सकते हैं अप्रैल के महीने में, मैं डेट बता दूंगा)
यह तो बात सिर्फ़ एक जगह की है बिहार में, हालत ये है कि महंगी कीमत पर चोरी से शराब उपलब्ध हो जाती है।
¶(शराब पीना सही और ग़लत की बात मैं नहीं करूँगा इतना सयाना नहीं हुआ हूँ कि कुछ कहूँ सिर्फ़ आपको आज के वर्तमान का बता रहा हूँ, हाँ बात और है कि "सच" सबको पसन्द आये ज़रूरी नहीं)
◆◆◆ अभी नशे के अलग अलग विकल्प ढूंढ चुके हैं बच्चे (बच्चे से तात्पर्य 13 साल तक के बच्चे)
अभी के लिए बस इतना ही कहूँगा, इसके लिए सिर्फ़ राजनीति ज़िम्मेदार नहीं है। आप और हम पूरा बिहार शामिल है इसमें। स्थानीय स्तर पर हम और आप ही होते हैं जो अंतिम व्यक्ति है। लेकिन हम हमेशा यह सोचकर चुप रह जाते हैं की सामने वाला आख़िरी व्यक्ति है। हमारा काम हो गया तो सब ठीक।
दोस्त,चाची, चचा, बाबा, दादी (जो स्थानीय स्तर पर राजनीति, विधि व्यवस्था और न्यायव्यवस्था में शामिल हैं) आप अपने परिवार को भेज देंगे बाहर भगवान करें आप सक्षम हो लेकिन आप की थोड़ी सी दरियादिली से बाकी समाज का भी भला होगा।
दोस्त,चाची, चचा, बाबा, दादी (जो अपने घरों के करता धरता हैं) कोई नहीं आने वाला जादू कर के सब ठीक करने। आप ख़ुद से कम से कम शुरू करो।
◆क्या शुरू करोगे?
सोचना और समझना शुरू करो। कि आपके आसपास हो रही समस्याओं पर कम से कम बात करना कैसे शुरू किया जाए। तभी तो काम शुरू होगा बदलाव के लिए।
बाकी नीतीश चचा ने अच्छी कोशिश की है, उससे पहले लालू चचा ने भी अच्छी कोशिश की है, उनसे पहले वाले चचा ने भी अच्छी कोशिश की है। अब हम सब को सामाजिक स्तर भी अच्छी कोशिश करनी है। (क्या क्या कोशिशें हो सकती हैं अगले ख़त में लिखूँगा)
◆इस चुनाव में रखना ध्यान◆
◆कैसे बढ़ेगा बिहार का मान◆
बदलाव की कोशिश में
एक बिहारी
🙏🙏🙏