भोपाल में जब था तब एक बार एक आर्टिस्ट रिट्रीट के लिए उत्तराखंड गया था। उस वक्त पहली बार बादलों को इतने नज़दीक से देखा था कि छू सकूं। फिर पिछले साल चंपावत, उत्तराखंड पहुंचा था। तब भी पहाड़ों को देखकर एक अलग सी खुशी होती रही। इस बार पहली बार हिमाचल में हूं। लेकिन तीसरी बार पहाड़ों में हूं। पहली बार पालमपुर गया। वैसे पहले बैजनाथ पहुंचा। वहां से वापस पालमपुर गया। पालमपुर अपनी जिन बातों के लिए फेमस है उसमें से कोई भी कारण नहीं था मेरे जाने का।
पालमपुर को मैंने सिर्फ़ फिल्मों में देखा था। जब भी पहाड़ों की बात आती है तो चंबा, शिमला, या जम्मू जी होते हैं फिल्मों में। पालमपुर भी इन्हीं फिल्मों से मेरे ज़ेहन में बचपन से है जबसे मैंने सिनेमा देखा है और जबसे चीज़ें याद रही हैं। पालमपुर पहुंचने के बाद बस स्टैंड के आसपास की चीज़ें हो देखी। क्योंकि मुझे कंडबाड़ी, गांव भी लौटना था जहां की ये तस्वीर है।
पालमपुर, पहुंचकर वहां के पहाड़ों को देखने के साथ साथ उस बचपन को भी देखा जहां ये नाम कैद था कभी। और ये महसूस करना अपने आप में कुछ पा लेने जैसा था। पालमपुर ज़्यादा देखा नहीं क्योंकि मैं पालमपुर को नहीं आया हूं। इसीलिए शाम से पहले बस लेकर लौटने लगा। बस से "ध्रमण" उतरना था। जब बस में बैठा तब एक पैसेंजर भी बगल की सीट पर बैठी। सोचा बात करूं। लेकिन अगले ही पल खिड़की से बाहर देखने लगा। बस कंडक्टर को बोला कि मुझे "ध्रमन" उतार दे। तब बगल की सीट पर बैठी, उसने कहा "आप फिकर मत कीजिए, ध्रमण आएगा तो बता दूंगी"
ये सुनकर थोड़ी राहत हुई। अगले ही पल उसने पूछा "आप कहां से हैं? क्या करते हैं?" मैंने उसे बताया मैं बिहार से हूं। और मैं लिखने की कोशिश करता हूं" जवाब पाते ही उसके चेहरे पर एक भाव था जिसने उस भाव को सवाल में बदल दिया "इतनी दूर से यहां ध्रमण में क्या करने आए है?" मैंने मेरे वर्कशॉप के लिए "कंडबाड़ी" जाने के बारे में बताया। "आपको ट्रैवल पसंद है? मुझे तो बिल्कुल भी नहीं पसंद, मेरा बस चले तो हिमाचल से बाहर कहीं नहीं जाऊं"
मैंने हंसते हुए कहा "हमारे बहुत से दोस्त हैं जिनको घूमना नहीं पसंद, ज़रूरी नहीं की सब एक जैसे हों" फिर उसने कहा बात तो सही है लेकिन अगर ऐसा होता की बिना ट्रैवल किए सारी जगहों पर घूम सकते तो ठीक था। ये कहते हम दोनों हंस पड़े। मैंने कहा "जादू तो कभी भी हो सकता है, जिस दिन होगा उस दिन आप बिहार भी आना, खूबसूरत जगह है" वो पालमपुर में किसी ऑफिस से लौट रही थी।
ध्रमण के पहले ही उसने मुझे तैयार रहने को कहा।
उतर कर मैंने नीचे से थैंक यू कहा। और बस चल पड़ी।
मैने बस को जाते देख मन ही मन कहा "दुनिया में जादू की कितनी कमी है"
- बोज़ो
4 मई 2024
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