Friday, 29 May 2020

मज़दूर पिता के नाम एक ख़त

डिअर पापा!

कुछ किताबें रूमपर ही छोड़ के आया हूँ। पिछले महीने थोड़ी सी लेट हो गयी थी किराया देने में तो 200 ज़्यादा देने पड़े थे। आपको याद है एडमिशन की रिसिप्ट लिए हम दोनों ने तलवंडी सर्कल पर गन्ने की जूस पिये थे। वो अपने गांव लौट चले गए। मैं और रूम के पास के बाकी स्टूडेंट्स जो एक ही ऑटो से जाते थे कोचिंग, उन चाचा ने उसी ऑटो में अपने कमरे का समान लादकर जैसे तैसे अपनी पत्नी और बच्चे के साथ घर लौटें। इतनी जल्दी में लौटें की हम सबके पास उनका 1 हफ़्ता का किराया बाकी रह गया है। धीरे धीरे ज़यादातर मेस बंद हुए। 

   माँ के साथ कभी कभी आटा गूंथना काम आया। फिर भी आटा हाथ और बेलन में बहुत चिपकता रहा। चावल पकाना आसान रहा। पानी और चावल की सही मात्रा से खाने में आसानी हुई। अंडा करी बनाते समय तेल के छींटे चेहरे पर पड़ गए पूरी तरह अभी ठीक नहीं हुआ है, मरहम लगा रहा हूँ। हॉस्पिटल में सामान्य चिकित्सा कम हो रही है इसीलिए एक दो गोली लेकर ही आना पड़ा। दूध की दुकान पर सर्कल में खड़े होने के बाद भी टीपू भैया ने दूध के पैकेट पर 3 रुपये ज़्यादा लिए। पूरे शहर में यही हाल है, सत्याग्रह करने का वक़्त भी नहीं था और नहीं परिवेश।



पापा आपसे जब भी पूछता हूँ कैसे हो कहते हो "ठीक हूँ" सब बढ़िया है। इस बार भी यही कह रहे हो। इस बार तो सब देख रहा हूँ मैं। दिल्ली में फैक्ट्री बंद हो चुकी है। घर से बाहर नहीं निकले हैं लोग। खाना पहुँचाया जा रहा है घरों तक। कुछ लोग बाकी रह जा रहे हैं। कुछ बता नहीं पा रहे की भूखे हैं। पापा कुछ ऐसे भी होंगे "खाना खाया?" पूछने पर हाँ हाँ खा लिया है कहते होंगे। आपके जैसे ही। पापा कोचिंग की फीस की 2 इंस्टॉलमेंट अभी भी बाकी है। मुझे पता है की अभी कोई नौकरी नहीं है। माँ के खाते में 500 रुपये आये हैं जनधन खाता वाला। आपको पैसे भेज देगी माँ। 

पापा आप पैदल आ रहे हो ये फूफाजी ने कॉल पर बताया। छाले की बात न भी करोगे फिर भी हर रोज़ देख रहा हूँ मैं लोगों को। आप बिल्कुल भी नहीं बताओगे की रास्ते में कुछ खाने को मिला या नहीं। किसी ने पानी पीने भी दिया या नहीं। यहाँ स्कूल में क़ुरएन्टीन सेंटर बनाया गया है। पहले से मेडिकल जाँच और जल्दी आने से थोड़ी सी आसानी हुई। बसों से स्टूडेंट्स का वापस लाने का फैसला जैसा भी हो। अभी सबकुछ नज़र आ रहा है। 120 के क़रीब लोग बाहर के राज्यों से हैं। यहां 21 दिन रखा जाएगा प्रवासी मजदूरों को। 


पापा अब जब आप लौटोगों क़ुरएन्टीन के बाद घर पर। हम बातें करेंगे| वे सभी बातें जो आपने यह कहकर नहीं बताया की परेशान हो जाऊँगा मैं। आपके पैरों में छाले वाली बात भी अख़बार में देखते हुए माँ के मुँह से निकल गई तो जान पाया। बस अब आप जल्दी से आ जाओ। इस लॉकडाउन में साथ रहना है आपके। आपके गले लगना है। और कहना है "पापा  I love you"...


मजदूर बाप का 
छोटा बेटा

5 comments:

  1. Bahut likh bhi nhi paate.. koi bhi khat

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  2. Bahut se log likh nahi paate

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  3. कितना ख़त लिखा ही नहीं जाता

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  4. Du hast deinen Brieff sehr schön geschrieben, bozo

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