हम सभी अपने समाज के अलग अलग हिस्सों को अलग अलग लोगों के ज़िम्मे छोड़ देते हैं। हमारे कर्तव्यों का हिस्सा भी कभी कभी हम ऐसे भूला देते हैं जैसे हमें कोई फ़र्क़ नहीं। लेकिन संवेदनायें कब किस मनुष्य को समाज निर्माण का कार्य सौंप दे यह समय की बात है।
और आज समय ऐसे ही कुछ युवाओं की है ऐसे ही एक नाम की है जिसका नाम है "एजुकेशन फ़ॉर चेंज"। आज एजुकेशन फ़ॉर चेंज के ठीक दो साल पूरे हुए हैं। कोरोना के इस संकट में भी बच्चों के बीच मास्क, साबुन, बिस्किट और चॉकलेट बाँट कर दो साल पूरे होने का उत्सव साझा किया।
एजुकेशन फ़ॉर चेंज बिहार के तीन जिले मुजफ्फरपुर, वैशाली, सीतामढ़ी में आर्थिक स्थिति से कमजोर और समाज से कटे हुए बच्चों को निशुल्क शिक्षा देने का काम कर रही है। बच्चों को निशुल्क कॉपी किताब और मदद करने का काम करती है। स्कूल में नाम लिखा कर पढ़ाई छोड़ चुके बच्चों को पढ़ाई से जोड़े रखने का बेहतरीन काम करती है।
"सन्तोष अम्बेडकर" बिहार के सीतामढ़ी के रहने वाले हैं। मुजफ्फरपुर से अपनी पढ़ाई के साथ साथ "एडुकेशन फ़ॉर चेंज" की स्थापना कर समाज को एक नई दिशा देने का काम किया है। (लोगों की मदद करने के लिए अपने नाम से जमा किये गए एल आई सी फण्ड भी निकाल लिया)
"एजुकेशन फ़ॉर चेंज" अहम सदस्यों में मुज़फ़्फ़रपुर जिले के बरकुरवा गाँव के बिट्टू कुमार बच्चों को पढ़ाते हुए कहते हैं "बस आने वाले कुछ साल और फिर हमसे जुड़े हुए सभी बच्चे पढ़ लिख कर ख़ुद का उज्ज्वल भविष्य बनाएंगे"। छोटे छोटे बच्चों में देश का भविष्य झलकता है।
साथियों में तुर्की गाँव के "रजनीश" हमेशा कहते हैं हम सभी एक माध्यम हैं जो किसी के सेवा करने का अवसर हमें मिलता है। सोनू कुमार का विश्वास है "आज समाज में शिक्षा के माध्यम से ही हम बदलाव ला सकते हैं"।
इस लॉकडाउन में क्या किया?
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एजुकेशन फ़ॉर चेंज ने इस पूरे लॉक डाउन में हर दिन लगभग 300 फ़ूड पैकेट्स ज़रूरतमंद लोगों तक पहुंचाया वही जिले के अलग अलग गांव जैसे मोहनपुर, बरकुरवा, सिरोही, चढूआँ में सूखा राशन भी दिया।
तुर्की मेला गाछी में मध्यप्रदेश देवास के लगभग 80 और चित्रकूट उत्तरप्रदेश के 20 लोगों को खाना पहुचाने का काम करते करते कुढ़नी और मुज़फ़्फ़रपुर का ध्यान खिंचा जिससे सभी को पहले लॉक डाउन खत्म होने के बाद सरकारी राशन मिल पाया। वही कुछ और भी स्थानीय लोग मदद के लिए आगे आएं। जारी लॉकडाउन में भी लोगों की मदद कर रहें हैं। आजमगढ़ से 4 दिनों में मुज़फ़्फ़रपुर के तुर्की में पहुँचने वाले मालदह पश्चिम बंगाल के 8 लोगों को भोजन कराने के साथ साथ रास्ते के लिए भी भोजन दिया।
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एडुकेशन फ़ॉर चेंज एक उदाहरण है सकारात्मक सोच की जिससे वर्तमान पीढ़ी और आने वाली पीढियां भी समाज निर्माण में बढ़ चढ़ कर आगे आएंगे।
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