आदरणीय,
हम आपसे बहुत नाराज़ हैं। आप तो समानता में विश्वास रखते हैं। जब भी मित्रों!! कहते हैं तब लगता है कि हम जैसे सुदूर इलाके में टूटी फूटी सड़कों को भी आप जी जान से प्यार करते हैं। लेकिन देखिए न बहुत बुरा लग रहा है। कुछ दिन पहले आप भोपाल आये थे। उससे पहले तक हम सब सड़कें अपना अपना क़िस्मत भोग रहे थे। इंस्टाग्राम पर हम जैसे सड़कों पर एक वीडियो भी बना एक डब्बे में धनिया मिर्च मसाला लेकर दो लोग हमारे ऊपर से गुजरे और थोड़े देर में अपने आप चटनी बन गयी। वीआईपी तरफ़ का रोड अक्सर चकाचक रहता है। हम समझते हैं उधर मुम्बई वाला फील आता है तो बढ़िया स्थिति रहती है। जब हम बने थे तो बड़ी खूबसूरत काले थे समय के साथ साथ थोड़ा धूप बारिस झेलते हुए गोरापन खा गया हमें। एक एक करके हमारे अलग अलग जगह पर मरम्मत होती रहती है तो बढ़िया काले हो जाते हैं उसकी अनुभूति ठीक वैसे है जैसे 15 लाख रुपये किसी के एकाउंट में आ गए हैं। सच कहिए तो काला धन आप जब भी वापस लाये हम सड़कों से कंपीटिशन मत कराइयेगा। हम काले धन से भी ज़्यादा काला रहना चाहते हैं।
आदरणीय!
ये सब कहते कहते रोना इस बात का आ रहा है कि भोपाल में जब आपके आने की तैयारी हुई तो हम उसमें शामिल नहीं हुए। हमारा जो भी भाई लोग शामिल होने वाला था सब अच्छे से पिच हो गए, बढ़िया पेंटिंग डेंटिंग हो गयी उनकी। सब लोग कह रहे थे कि पूरा वाशिंगटन डीसी जैसा हो रहा है सड़क। सच पूछिए तो वाशिंगटन डीसी की सड़कों से हमारी बातचीत नहीं है फिर भी मान लिए की जिस भी सड़क की मरम्मत हुई वो उनके जैसे ही बन गए। बात ये है कि धीरे धीरे बनते तो सही तरीके से बिल पास होता सड़क बनने का तो कोई दुःख नहीं होता लेकिन सिर्फ़ आपके आगमन से ही उनका उद्धार हो गया ये तो वही बात हुई कि किसी विशेष जगह कोई जन्म लिया है, विशेष जाति में जन्मा है तो भाग्य के नाम पर उसको सब नसीब हो जाये और हम नहीं है वैसे तो हमारे नाम के रिज़र्वेशन को भी पहुँचने में हज़ारों साल लग जाये। पता है आपको जिनसे आप गुज़रे अब वो सड़के हमें मुँह तक नहीं लगाती। उनका भाग्य ही बदल गया है अब हमें कैसे पहचानेंगे। मुँह चिढ़ाते हैं हमारा। अगर वो न भी चिढाये तो कुछ लोग चाय की टपरी पर बैठे बैठे कह देते हैं "भाई चलो नयी सड़कों पर घूम के आये"। हँसतें हैं हम पर "जाने कब ये सड़कें बनेंगी"।
आदरणीय!
हम सब किसी विशेष क्षेत्र में होने के कारण सदियों से अनदेखा किये जाते रहे सड़कें,
हमेशा से हे कि दृष्टि से देखी जाती रही सड़कें,
हम जिनपर लोग सिर्फ़ ट्रोल करने के लिए गाड़ियां चलाते हैं या मज़बूरी में,
हम सड़के जो चाहते हैं कि प्रेमी जोड़े हमारे तरफ़ से भी गुज़रे,
वो सड़कें जो आपके आगमन पर भी याद नहीं कि गई।
बस आपसे विनती है कि बस झूठा वादा ही कर दीजिए कि हमारे तरफ़ आएंगे आप। हमारा नसीब बदल देंगे आसपड़ोस के नेता सभी। मुझे विश्वास है कि आप हम सबको ऐसे भेदभाव का शिकार नहीं होने देंगे।
आप पूरा करें न करें। बस एक झूठा वादा ही कर दीजिए हमारा भाग्य बदल जायेगा।
आपका
आपसे नाराज़
आपके इंतिज़ार में
बेनाम सडकें
🙏🙏🙏
What a satire...����������
ReplyDeleteExcellent��