Thursday, 9 December 2021

परिभाषाएं

      
   परसों रात मैं शब्दों की उत्तपत्ति, शब्दों के भाव, शब्दों की यात्रा, शब्दों का संदर्भ सभी सोचते हुए कुछ लिखने की कोशिश कर रहा था। एक फोटोग्राफर भैया ने शायद मुझे तब से देख रहे थे जब मैंने शीर्षक "शब्द और जीवन" लिख लिया था। दो पैराग्राफ लिखने के बाद मैंने लिखना थोड़ा सा  रोका। वो भैया पास की कुर्सी पर आकर बैठे और पूछ लिया क्या करते हैं आप? अब ये सवाल कोई भी करता है तो मैं थोड़ी देर रुकता हूँ सोचता हूँ क्या क्या कहना है? कहना भी है कि नहीं। या बस कुछ नहीं कहकर मुस्कुरा देना है। पर उनके हाथ में कैमेरा था और महसूस हुआ कि खुलके बात की जा सकती है तो मैंने कह दिया "कभी कभी लिख लेता हूँ"। बाक़ी इंजीनियर हूँ। उन्होंने कहा "मैंने देखा आपको लिखते हुए"। शब्द और जीवन काफ़ी अच्छा शीर्षक है। मैंने मुस्कुरा कर धन्यवाद किया। उन्होंने फिर पूछा वैसे क्या लिख रहे थे? 

      मैं सोच रहा था कि शब्दों की उत्तपत्ति कैसे हुई होगी। जब सदियों पहले बिजली की आवाज़ से डर कर इंसान गुफाओं में डर कर भागा होगा उसने कैसे किसी और को बिजली के बारे में बताया होगा? पुरातत्वविदों ने बहुत सारी भाषाएँ और लिपियां ढूंढ ली हैं बहुत सी बातें पढ़ ली हैं। लेकिन बिजली के बारे में बताते समय पहले इंसान ने कैसे समझाया होगा कि "बिजली" जब भी कड़कती है तो डर लगता है, बिजली डरने की चीज़ है। दूसरे इंसान ने जब बिजली का कड़कना सुना होगा तब उसने ठीक हूबहू बताने की कोशिश की होगी ये है "बिजली" इससे डर लगता है, इससे डरना चाहिए, इसके ठीक बाद आसमान से बारिस होती है। प्रेम, द्वेष, दोस्ती, समाज, विदाई, वक़्त, परिवार सभी शब्दों के बारे में बात करते हुए मैंने कहा मैं ऐसा कुछ सोच रहा था। इतने में  वे उठें और कुछ फ़ोटो खींचकर वापस आये और कहा "सच में शब्द और भाव ज़िन्दगी के मायने बदल देते हैं, अब देखिए किसी के लिए फ़ोटो का मतलब है यादों को संजोना और मेरे लिए इसके साथ साथ है घर परिवार चलाना। अच्छा सोच रहे हैं लिखिए लिखिए। इस बातचीत के दौरान वो चार पाँच और फ़ोटो खींच चुके थे। 
     
    उन्होंने बताया वो पिछले 30 साल से फोटोग्राफी कर रहे हैं। मैंने उन्हें अपनी खींची हुई कुछ तस्वीर भी दिखाई। उन्हें काफ़ी पसंद आया। बात करते करते काफ़ी चीज़े उनके बारे में जानने को मिली। उनके फ़ोटो भी अलग अलग भाव लिए हुए अपनी यात्रा का वर्णन कर रहे थे। बहुत सारी यात्राओं और अनुभवों की बात हुई। पर "शब्द और जीवन" वहीं दो पैराग्राफ़ तक रुका है। आज के आर्मी हैलीकॉप्टर क्रैश के बारे में सुनने के बाद बस यही सोच रहा हूँ। ये मृत्यु शब्द क्या है। "मृत्यु" शब्द के बारे में सबसे पहले इंसान ने किसी को कैसे बताया होगा कि मृत्यु क्या है? उसका भाव क्या है? उसकी यात्रा क्या है? पहली बार किसने किया होगा मृत्यु को परिभाषित?

3 comments:

  1. वैसे तो हम स्वयं अपनी मृत्यु के बारे में नही बता सकते परंतु मृत्यु को पहली बार उसने ही परिभाषित किया होगा जिसकी मृत्यु जीते जी हो गई हो अर्थात् किसी के चले जाने से उसके जीवन में जीवन का अंश शून्य हो गया हो मानो जैसे जीवन का कोई औचित्य ही नही बचा हो उसी ने पहली बार मृत्यु को परिभाषित किया होगा पर मृत्यु की परिभाषा जीवन की परिभाषा से भी ज्यादा विस्तृत है ये मेरा व्यक्तिगत मानना है 😶।

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