चलिए! आज आपको एक दुकान में लिए चलता हूँ। कपड़े की दुकान में। पहुँचते ही दुकानदार आपसे पूछता है,
क्या चाहिए? और आपको चाहिए होता है जींस। और आपके जींस कहते ही आगे की बातचीत शुरू होती है।
जिंस के वरायटी में सबसे पहले दुकानदार पूछता है; प्लेन या डिज़ाइन? अगर आपने कहा दिया डिज़ाइन तो सबसे पहले उसका कहना होता है कितना तक चलेगा, डिज़ाइन का रेट थोड़ा हाई है। ये पूछते ही लगता है जैसे दुकानदार कह रहा ज़्यादा अच्छा कपड़ा पहनने की हैसियत है कि नहीं एक बार देख लो क्योंकि महंगी है। अब बात जब भी हैसियत की हो मानवीय गुण कहता है कि मानवीय मन "सामने वाले से हैसियत बड़ी है मेरी" का भरम पैदा करता है। और आप फिर कह देते है अरे आप दिखाओ।
वो आपको प्लेन जींस के फायदे बताता है और टिकाऊ होने का विश्वास भी दिलाता है। आप पूछते हैं डिस्कलर होगा तो वापस करेंगे जीन्स? वो आपको सारे वादें और फ़ायदे की बातचीत में बता चुका होता है कि वापस तो नहीं होगी जींस। कभी कभी अगर ट्रायल रूम हो और आपने जींस पहनकर देख लिया तो फिटिंग का पता चल जाता है। लेकिन यदि आप हैं जो जींस पहनकर देखना घर पर पसंद करते हैं तो ट्रायल कर ही नहीं पाते। आप दुकानदार की बातों पर भरोसा करते हुए घर लौटते हैं। अगर दुकान के बाहर "बिका हुआ माल वापस नहीं होगा" का बोर्ड लगा हुआ है तो आप अपना जींस ध्यान रखकर ही ख़रीदते हैं कि दुकान से निकलने बाद कैसे भी करके जींस से काम चलाना पड़ेगा।
अब हो सकता है कि आपके पास यही एक जींस है जिसे आपको पाँच साल चलाना है तो क्या करेंगे आप?
अब पाँच साल सुनते ही आपके मन में बिहार में होने वाला पंचायत चुनाव का ख़याल आ गया होगा। 24 सितम्बर से लेकर 12 दिसम्बर तक 11 चरणों में होने वाले पंचायत चुनाव का बिगुल तो बज चुका है। और अब आपके कानों में बहुत से नेताओं के नये नये उभरते नेताओं की मीठी मीठी आवाज़ कानों में शहद घोल रही होगी। वैसे बिहार में 16 जिला बाढ़ का कहर झेल रहा है 34 लाख लोग प्रभावित हुए हैं। उनके लिए चुनाव के चरण इस तरह रखे गये हैं कि तबतक बाढ़ की हालत ठीक हो जायेगी। अभी तो गंगा मईया और बूढ़ी गंडक हमसें नाराज़ ही है।
पूरे बिहार में पंचायत चुनाव के तहत कुल छह पदों मुखिया के 8072, वार्ड सदस्य के 1,13,307, पंचायत समिति सदस्य के 11,104, जिला परिषद सदस्य के 1160, पंच के 1,13,307 व सरपंच के 8072 पदों के लिए चुनाव होगा।
याद कीजिये कि पिछले चुनाव में जो मुखिया, चुनाव लड़ने के लिये प्रत्याशी हुए थे वे कैसे दुकानदार थे। किस तरह का जींस आपको बेचा उन्होंने। रंग बदला की नहीं? फिट हुआ कि नहीं? वादे के मुताबिक़ चल रहा है या आप बस इंतिज़ार में हैं कि हालत ही तो नया जींस ख़रीद लें। वैसे अभी न थोड़ा बहुत ट्रायल तो सभी प्रत्यासी दे ही रहें हैं।
बात ये है कि जींस की दुकान से आप जींस नहीं खरीदेंगे फिर कोई दूसरा ग्राहक आकर खरीदारी तो करेगा ही। और ये तो चुनाव की दुकान है, हर दुकानदार अपनी क़्वालिटी बताकर बेचता ही रहेगा। तो थोड़ा सा समझिए कि आपको वादे के मुताबिक़ और ज़रूरत के हिसाब से अच्छी फ़ीट एंड फाइन जींस ख़रीदनी है।
मुखिया पंचायत का एक अहम हिस्सा है। आईए जानते हैं क्या है मुखिया की जिम्मेदारियां -
मुखिया की ज़िम्मेदारियां-
1) ग्राम सभा और ग्राम पंचायत की बैठकें आयोजित करना और उनकी अध्यक्षता करना। एक कैलेंडर वर्ष में कम से कम चार बैठकें आयोजित करना।
2) बैठकों का कार्य-व्यवहार संभालना और उनमें अनुशासन कायम रखना।
3) पूंजी कोष पर विशेष नजर रखना
4) ग्राम पंचायत के कार्यकारी प्रशासन की देख-रेख
5) ग्राम पंचायत में कार्यरत कर्मचारियों की देख-रेख और दिशा निर्देश देना।
7) ग्राम पंचायत की कार्य योजनाओं/प्रस्तावों को लागू करना।
8) नियमानुसार रखी गई विभिन्न रजिस्टरों के रख-रखाव का इंतजाम करना।
9) ग्राम पंचायत के तय किए चंदों, फीसों और टैक्सों की वसूली का इंतजाम।
10) विभिन्न निर्माण कार्यों को कार्यान्वित करने का इंतजाम करना।
11) राज्य सरकार या एक्ट अथवा किसी अन्य कानून के अनुसार सौंपी गई अन्य जिम्मेदारियों और कार्यों को पूरा करना।
मुखिया की ये ज़िम्मेदारियां आपको मालूम होने चाहिए। तभी तो आप जान पायेंगे कौन सी ज़िम्मेदारी निभाई नहीं गयी पहले और कौन सी निभाई जानी चाहिए थी। आपके जीवन में अक्सर ऐसा समय आता है जब बहुत में से एक चुनना होता है। तो याद रहे कि आपकी भी ज़िम्मेदारियां और कर्तव्य क्या हैं। याद रहे आप पाँच साल फिर ये जींस बदल नहीं पायेंगे।
बाक़ी आपको कैसा जींस चाहिए ये बात आपसे बेहतर कोई और नहीं बता सकता। दुकानदार भी नहीं।