Wednesday, 29 September 2021
कविताएँ
विरह
Friday, 24 September 2021
टोपी शुक्ला
Saturday, 18 September 2021
एक चिथड़ा सुख
Wednesday, 1 September 2021
हमारा मुखिया कैसा हो?
Saturday, 28 August 2021
डूबता सूरज
इससे पहले काविश को इतने ध्यान से नहीं सुना था। रात के 1 बजने को है। बिन मतलब बस लिखने को लिखना शुरू किया है। कितना अज़ीब है हर बात में मतलब ढूंढ़ना भी तो ठीक नहीं। जैसे रिश्तों में। जैसे बच्चों की हसीं में। जैसे किसी को बिन कुछ कहे देखने में। जैसे इस तस्वीर में डूबते हुए सूरज का मतलब क्या है। इतनी रात गये जगने का मतलब। बाढ़ के आने का मतलब। आसमां के बादलों का पानी में दिखने का मतलब। हर लिखे में तुम्हारा ख़याल आने का मतलब।
ऐसा नहीं लगता जैसे कभी कभी बिन सवाल किये भी साँसें चलती रहनी चाहिये। भले ही इंसान ज़िंदा न हो कम से कम ज़िंदा होने का भरम तो लगा रहे। ऐसे मुझे अभी नहीं पता कि काविश का दूसरा गाना "तेरे प्यार में" भी खूबसूरत लग रहा है।
गाँव के निचले हिस्से में जिनका घर है उनके घरों में पानी आ चुका है। मैं सोचता हूँ ये पानी हर आकार में ढल सकते हैं तो ऐसा क्यों नहीं करते कि सिर्फ़ वही रास्ता लेते जो एक खूबसूरत दृश्य बनाता हमेशा। फिर मैं सोचता हूँ ये आंखों का पानी भी तो भीतर की ओर हृदय तक बहता होगा और उसका परावर्तित अंश बाहर गालों से होते हुए हवाओं में सुख जाता है। पर अंदर की ओर बहने वाले उस पानी तक तो कोई सूरज की रोशनी नहीं पहुँचती।
बाहर का पानी हवाओं के स्पर्श से भी सुख जाता है और अंदर तक रोशनी भी मयस्सर नहीं। जिन घरों में पानी हैं वो बाढ़ के ख़तम होने के इंतिज़ार में कुछ महीने गुज़ार ही लेंगे। खेतों में आया बाढ़ पूरा का पूरा आईना बन चमकता है। दिन में आसमां भी उतर आता है नीचे। कभी कभी कुछ बादल कुछ बची हुई फसलों को देख तन्हा नहीं रहने देती, बरस जाता हैं। शायद बादलों को पता है अकेले ज़िंदा रहना अकेले मर जाने से भी भयानक है।
पिछली शाम जब ये डूबता सूरज दिख रहा था लगा सिर्फ़ सूरज डूबता रहता तो इतना अज़ीब नहीं लगना था। सूरज के डूबने के साथ पूरी रात के लिए डूब जाते हैं पेड़ों के पत्तो की हरियाली, चिड़ियों की उड़ान, बच्चों के खेल और लगता है मानों रात भर इन डूबे हुए हरियाली, उड़ान और खेल से कोई गीत गा रहा हो।
अभी काविश का गाना बदल कर मैंने बंदिश बैंडिट का "विरह" लगा दिया है।
Thursday, 3 December 2020
भोपाल गैस त्रासदी
Thursday, 8 October 2020
बधाई हो! राजनीति हुई है...
Tuesday, 6 October 2020
हम प्रेम को नहीं नकार सकतें
जब भी कोई मुझसे ये पूछता है कि गाँधीजी के किन विचारों को मानते हैं आप? तो घबरा जाता हूँ। क्या जवाब दूँ मैं। सत्य, अहिंसा, न्याय, सर्व धर्म सम्भाव ऐसे बहुत से शब्द ज़ुबान पर आते हैं और सामने वाले को गाँधीजी के प्रति मेरा लगाव ठीक ठीक पता हो आता है। दरअसल मैं इस प्रश्न से हमेशा भागना चाहता हूँ। क्योंकि मुझे मालूम नहीं कि मेरे अंदर ऐसे कौन एक आधा गुण भी है जो गाँधीजी के कहे हुए किन्हीं विचारों से मिलता जुलता है। फिर मुझे सबसे आसान लगता है अपने बचपन में दौड़कर भागना।
Monday, 14 September 2020
"हिंदी दिवस"
Sunday, 6 September 2020
ये दिन याद बहुत आएंगे..
प्रिय प्रधानमंत्री जी! कहना क्या चाहते हैं आप?
प्रिय प्रधानमंत्री जी! पिछली चिट्ठी का जवाब आपने नहीं दिया। इसका दुःख उतना नहीं है, जितना दुःख इस बात का है कि आप हम बिहारियों क...
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प्रिय प्रधानमंत्री जी! कोमल चरणों में सादर प्रणाम। हम सब यहां कुशल मंगल हैं। आशा है कि आप भी स्वस्थ और ख़ुश होंगे। मैं पहले कि द...
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