कोमल चरणों में हम "आम शादी बिरादरी" का सादर प्रणाम स्वीकार कीजिये। हम सब कुशल नहीं हैं और नहीं हमारे होने से कुछ भी मंगल है। तो इधर का बहुत कुछ आपसे बतियाना है। आप स्वस्थ्य तन्दरुस्त और पहले से बेहतर हो यहीं कामना है।
देखिए! आपको भी पता है शादियों का सीज़न अपने चरम सीमा पर है। जिधर देखिए फेसबुक व्हाट्सएप पर शादियां ही शादियां चल रही हैं लेकिन हमें अपने बिरादरी के शादियों से हमदर्दी है। चाहे आम शादियों में कितनी ही शिकायतें हों। दहेज़ के लिए लड़की वाले का ज़मीन बिक गया हो या 5 लाख का कर्ज़ हो गया हो। बाराती में डांस करने के लिए गौआँ (Vilagers) और बाराती के बीच मार हो गया हो। या फिर दूल्हे के जीजा अपने टाइम का बाक़ी दहेज़ के लिए नखरा करके नाराज़ हो गए हों। या की बड़की भौजी बीयूटी पार्लर न जा पाने के लिए नाराज़ हो। या की 200 की जगह 300 बाराती पहुँच जाने की वज़ह से खाना कम जाने की समस्या हो। मंडप पर लड़का पक्ष से मनचाहा गहना न चढ़ाया गया हो। इंजीनियर लड़का के नाम पर राशन की दुकान चलाने वाले लड़के से शादी हो रही हो। ये सारी शादियां हमारी बिरादरी के हैं "आम शादियां"।
आपने भी रामानंद सागर कृत "रामायण" देखा होगा। उसमें श्रीराम जी ने कितने सुंदर तरीक़े से बाण पर प्रत्यंचा चढ़ाया और बाण टूट गया। श्रीराम और माता सीता की शादी हुई। ये सदियों पहले की बात है इसीलिए थोड़ी सी भी ग़लती हो हमसें तो हमें क्षमा कर दें। श्रीरामचंद्र जी और माता सीता की शादी आम शादियों में से एक नहीं थी। सदियों से हम शादियों को उस शादी को प्रेरणा मानकर सफ़ल होने की प्रार्थना की जाती है। इनदिनों ऐसी शादियां तो कल्पना में ख़ुश रहने के लिए है। देखिए न अब तो त्रेता युग है नहीं कलयुग हैं। हर घर है रावण बैठा इतने राम कहाँ से लाऊँ वाली बात है।
हर बच्चा जिसे पढ़ने के लिए संसाधन उपलब्ध है वो अपनी पूरी ज़िंदगी अच्छे से पढ़ाई करने में गुज़ार रहा कि नौकरी मिल जाये। तो शादी की योग्यता पूरी हो। पहले हम आम शादियां भी काफ़ी ख़ुश रहती थीं। सरकारी नौकरी वाली शादियों में हमारा रुतबा रहता था। पर जब से प्राइवेटाईज़ेशन ज़ोरो शोरों से बढ़ रहा है बड़ा डर लगा रहता है। ऊपर से तो 2018 में हुए एग्जाम के रिजल्ट अभी भी पेंडिंग में हैं। बच्चे लुसेंट की किताबें लेकर सोते जागते हमारा सपना देखते हैं। बहुत से बच्चे जो सरकारी नौकरी करके शादी करके किसी के साथ घर बसाने का सपना लिए थे उनमें से बहुत से बच्चे प्रेमिका के बच्चे को 200 रुपये महीने ट्यूशन फ़ी लेकर पढ़ा रहे हैं। उन्हें अभी भी अपनी पूर्व प्रेमिका की बात पर यक़ीन है "हमसे बेहतर लड़की मिलेगी तुम्हें", ज़िस्म भले ही दूर है पर रूह हमेशा से तुम्हारा है।
फ़ॉर्म भरने के लिए बेरोज़गार बच्चे अगल बगल से कर्ज़े ले रहें हैं। कहीं एग्जाम सेंटर दूर हो गया तो बाइक से जाने का सोचते हैं लेकिन पेट्रोल का दाम देखकर रोने लगते हैं। उनको रोता देखकर हमें विदाई में फूट फूट कर रोती हुई माएँ याद आती हैं। हमारा मन करता है कि हम होने ही नहीं चाहिए थे। इतना दुःख होता है। हम सबको लगता है महँगाई भी जब ऐसे बच्चों को रोते देखती होगी तो कालेज़ा फट जाता होगा।
माफ़ कीजिये! पता नहीं अभी बहुत भावुक हो गयें हैं हम सभी। क्या बताने के लिए आये थे और क्या कह रहें हैं। ख़ैर! आप ऊपर के बेरोज़गारी, प्राइवेटाईज़ेशन, महँगाई पर बिल्कुल भी ध्यान मत दीजिये। पिछले 70 साल पर इसकी ज़िम्मेदारी डाल दीजिए। जैसे कुछ स्पेशल शादियों का बोझ हम आम शादियों पर आ जाता है। कोरोना के आने से जब पहली बार लॉकडाउन लगा तब हमें काफ़ी स्पेशल फ़ील कराया गया। हम आम शादी बिरादरी में भी सब स्पेशल लगने लगा था। सिर्फ़ 50 लोग। मास्क के साथ। डीजे नहीं। हमें तब उन सभी लड़की पक्ष के लिए अच्छा लगा जिन्हें नॉर्मल दिनों में 5 लाख कर्ज़ लेने पड़ते। कोरोनकाल में हमारे अस्तिव से हमनें कईं पुस्तों को क़र्ज़ के चुंगल में जाने से बचते देखा। जो सक्षम लोग थे उन्होंने पुलिस वालों को भी बुलाया 200 और लोगों के साथ। अब कहाँ तक ही बताएँ। हम आम शादी हैं इंवेशटिंग ऑफिसर थोड़े न हैं।
अभी सदियों से हमारे बिरादरी में थोड़ा बहुत नयापन आकर हमें इवॉल्व करता रहा है। कोरोना काल की आपदा में बहुत से लोगों के लिए हम अवसर बनें। उस वक़्त बहुत से कम लोगों ने फ़ोटो खिंचाया और पोस्ट किया दोस्तो को कम टैग किया कि कहीं 50 लोगों में शामिल न होने के कारण उन्हें दुःख न हो। हमें उस बात का दुःख नहीं है। हमें उतना दुःख नहीं कि बहुत से लोगों की शादियों में पहले प्रेमी ने आकर "जा सजना तुझको भूला दिया" गाया। हमकों इस बात का भी दुःख नहीं कि हमें हर बार समाज अपने हिसाब से यूज़ करे।
प्रधानमंत्री जी!
हमें बहुत रोना इस बात का आ रहा है कि कैटरीना और विकी कौशल की शादी हम आम शादी से बहुत अलग हो रहा है। बात अलग होने तक का नहीं है। हर बिरादरी में उप बिरादरी होती है नयी बात नहीं है। लेकिन बहुत बुरा लग रहा कि सब कोई कॉमन फोटों ही शेयर कर रहा। सब सलमान ख़ान का मीम बना रहा। रणवीर कपूर की बात कर रहे हैं। ये वहीं लोग हैं जो हम आम शादियों से पहले लड़कियों को प्रेम क्यों कि के नाम पर कूटते हैं, प्रेमी को लापता कर देतें हैं। जिससे शादी होती है उस वर के सामने लड़की ने कभी किसी लड़के से बात की होगी जैसी बात दूर दूर तक नहीं लाते। लड़के का किसी से प्रेम था का ज़िक्र नहीं करते। ये सब लोग सलमान ख़ान का तेरे नाम वाला फ़ोटो शेयर कर रहे हैं। हमकों इस बात का भी कम दुःख है। हम आम शादियों में लोग मुश्किल से वीडियो कैमरा बुक करते हैं और कैसेट बनने का पैसा देते हैं। एक टाइम डिसाइड करके पूरी फैमिली के साथ देखते हैं। लेकिन ई वाले शादी में वीडियो का पैसा भी देखने वाले लोग भरेंगे। ई तो हम आम शादियों से बहुत बड़ा भेदभाव है।
प्रधानमंत्री जी!
हम आम शादियों के साथ होने वाले इस भेदभाव को थोड़ा सा कम कीजिये। कम से कम जो लोग नहीं जा पाएं शादी में उनके लिए वीडियो तो मुफ़्त में मिले।
भेदभाव मुक्त शादियों के उम्मीद में,
"आम शादी बिरादरी"